जनाउ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]जनाउ †पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ जनाव] दे॰ 'जनाव' । उ॰—अवध- नाथ चाहत चलन, भीतर करहु जवाउ । भए प्रेम वस सचिव सुनि, विप्र सभासव राट ।—तुलसी (शब्द॰) ।
जनाउ †पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ जनाव] दे॰ 'जनाव' । उ॰—अवध- नाथ चाहत चलन, भीतर करहु जवाउ । भए प्रेम वस सचिव सुनि, विप्र सभासव राट ।—तुलसी (शब्द॰) ।