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जनेवा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जनेवा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ जनेऊ]

१. लकड़ी आदि में बनाई या पड़ी हुई लकीर या धारी ।

२. एक प्रकार की ऊँची घास जिसे घोड़े बहुत प्रसन्नता से खाते हैं ।

३. बाएँ कंधे से दाहिनी कमर तक शरीर का वह अंश जिसपर जनेऊ रहता है ।

४. तलवार या खाँड़े का वह वार जो जनेऊ की तरह काट करे । दे॰ मु॰ 'जनेऊ का हाथ' ।