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जपजी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जपजी संज्ञा पुं॰ [हिं॰ जप] सिक्खों का एक पवित्र धर्मग्रंथ, जिसका नित्य पाठ करना वे अपना मुख्य धर्म समझते हैं ।