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जपत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जपत पु संज्ञा पुं॰ [अ॰ जब्त] दे॰ 'जब्त' । उ॰—अपत करी बन की लता, जपत करी द्रुम साज । बुध बसंत कौ कहत हैं कहा । जानि ऋतुराज ।—सं सप्तक, पृ॰ ३८२ ।