जमालगोटा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]जमालगोटा संज्ञा पुं॰ [सं॰ जयमाल(=जमाल) + गोटा] एक पौधे का बीज जो अत्यंत रेचक है । जयपाल । दंतीफल । विशेष—यह पौधा करोटन की जाति का और समुद्र से ३००० फुट की ऊँचाई तक परती भूमि में होता है । यह पौधा दूसरे वर्ष फलने लगता है । इसका फल छोटी इलायची के बराबर होता है जिसके भीतर सफेद गरी होती है । गरीं में तेल का अंश बहुत अधिक होता है और उसे खाने से बहुत दस्त आते हैं । गरी से एक प्रकार का तेल निकलता है जो बहुत तीक्ष्ण होता है और जिसके लगाने से बदन पर फफोला पड़ जाता है । तेल गाढ़ा और साफ होता है और औषध के काम में आता है । इसकी खली चाह के खेत की मिट्टी में मिलाने से पौधों में दीमक और दूसरे कीड़े नहीं लगते । इसके पैड़ कहवे के पेड़ के पास छाया के लिये भी लगाए जाते हैं ।