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जयजयवन्ती

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जयजयवंती संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ जय + जयवंती] संपूर्ण जाति की एर संकर राहिनी जो धूलश्री, विलावल और सोरठ के योग से बनती हैं । विशेष—इसमें सब शुद्ध स्वर लगते हैं और यह रात को ६ दंड से १० दंड़ तक गाई जाती है; पर वर्षाऋतु में लोग इसे सभी उमय गाते हैं । कुछ लोग इसे मेघ राग की भार्या मानते हैं और कुछ लोग मालकोश का सहचरी भी बताते हैं ।