जलपीपल
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]जलपीपल संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ जलपिप्पली] पीपल के आकार की एक प्रकार की गंधहीन औषधि । विशेष—इसका पेड़ खड़े पानी में उत्पन्न होता है । पत्तियाँ बेंत की पत्तियों से मिलती जुलती और कोमल होती हैं । इसके तने में पास पास बहुत सी गाँठें होती हैं और इसकी डालियाँ दो ढाई हाथ लंबी होती हैं । इसके फल पीपल के फल की तरह होते हैं, पर उनमें गंध नहीं होती । यह खाने में तीखी, कड़ुई, कसैली और गुण में मलशोधक, दीपक, पाचक और गरम होती है । इसे 'गंगतिरिया' भी कहते हैं । पर्या॰—महाराष्ट्री । शारदी । तोयवल्लरी । मत्स्यादिनी । मत्स्यगंधा । लांगली । शकुलादनी । चित्रपत्री । प्राणदा तृणशीता । बहुशिखा ।