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जलहरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जलहरी संज्ञा स्त्री [सं॰ जलधरी]

१. पत्थर या धातु आदि का वह अर्घा जिसमें शिवलिंग स्थापित किया जाता हैं । उ॰— लिंग जलहरी घर वर रोपा ।—कबीर सा॰, पृ॰ १५८१ ।

२. एक बर्तन जिसमें नीचे पानी भरा रहता है । लोहार इसमें लोहा गरम करके बुझाते हैं ।

३. मिट्टी का घड़ा जो गरमी के दिनों में शिवलिंग के ऊपर टाँगा जाता है । इसके नीचे एक बारीक छेद होता है जिसमें से दिन रात शिवलिंग पर पानी टपका करता है । क्रि॰ प्र॰—चढ़ना ।—चढ़ाना ।