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जहँड़ना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जहँड़ना † क्रि॰ अ॰ [सं॰ जहन, हिं॰ जहँड़ाना]

१. घाटा उठाना । हानि उठाना । उ॰—हिंदु गूँगा गुरु कहै, मुसलिम गोयमगोय । कहैं कबीर जहँड़े दोऊ, मोह नींद सें सोय ।— कबौर॰ (शब्द॰) ।

२. धोखे में आना । भ्रम में पड़ना । उ॰—अब हम जाना हो हार बाजी को खेल । डंक बजाय देखाय तमाशा बहुरि सो तेल सकेल । हरि बाजी सुर नर मुनि जहँड़े माया चेटक लाया । घर में डारि सबन भरमाया हृदया ज्ञान न आया ।—कबीर (शब्द॰) ।