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जहत्स्वार्था

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जहत्स्वार्था संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार की लक्षणा जिसमें पद या वाक्य अपने वाच्यार्थ को छोड़कर अभिप्रेत अर्थ को प्रकट करता है । जैसे, 'मम वर गंगा माहि' यहाँ 'गंगा माँहि' से 'गंगा के बीच' अर्थ नहीं है, कितु 'गंगा के किनारे' अर्थ है । इसे जहल्लक्षणा भी कहते हैं ।