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जहीं

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जहीं पु क्रि॰ वि॰ [सं॰ यत्र, पा॰ यत्थ]

१. जहाँ ही । जिस स्थान पर । उ॰—सत्त खंड सात ही तरंगिनी बहै जहीं । सोह रूप ईश को अशेष जंतु सेवही ।—केशव (शब्द॰) । यौ॰— जही जहीं तहीं तहीं । उ॰— जहीं जहीं विराम लेत राम जू तहीं तहीं अनेक भाँति के अनेक भोग भाग सौ बढ़ै ।— केशव (शब्द॰) ।

२. ज्यों ही । उ॰—सीय जहीं पहिराई । रामहि माल सुहाई । दुंदुभि देव बजाए । फूल तहीं बरसाए ।—केशव (शब्द॰) ।