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जातिधर्म

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जातिधर्म संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. जाति या वर्ण का धर्म ।

२. ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य आदि का अलग अलग कर्तव्य । जिस जाति में मनुष्य उत्पन्न हुआ ही, उसका विशेष आचार या कर्तव्य । विशेष—प्राचीन काल में अभियोगों का निर्णय करते हुए जाति— धर्म का आदार किया जाता था ।