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जिनि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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जिनि ^१ अव्य॰ [हिं॰ जनि] मत । नहीं । दे॰ 'जनि' । उ॰— (क) यह उज्जल रसमाल कोटि जतनन कै पोई । सावधान ह्नै पहिरौ यहि तोरौ जिनि कोई ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २५ । (ख) जिनि कटार गर लावसि समुझि देखु मन आप । सकति जीउ जौ काटै महा दोष औ पाप । जायसी—(शब्द॰) ।

जिनि ^२पु सर्व॰ [हिं॰ जिन] जिन्होंने ।