जीवास्तिकाय
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]जीवास्तिकाय संज्ञा पुं॰ [सं॰] जैन दर्शन के अनुसार कर्म का करनेवाला, कर्म के फल को भोगनेवाला, किए, हुए कर्म के अनुसार शुभाशुभ गति में जानेवाला और सम्यक् ज्ञानादि के वश से कर्म के समूह को नाशा करनेवाला जीव । विशेष—यह तीन प्रकार का माना गया है,— अनादिसिद्ध, मुक्त और बद्ध । अनादिसिद्ध अर्हत् हैं जो सब अवस्थओं में अविद्या आदि के बंधन से मुक्त तथा अणिमादि सिद्धियों से संपन्न रहते हैं ।