झड़ी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

झड़ी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ जड़ना अथवा सं॰ झर ( = झरना) या देशी झड़ी ( = निरंतर वर्षा)]

१. लगातार झड़ने की क्रिया । बूँद या कण के रूप में बराबर गिरने का कार्य या भाव ।

२. छोटी बूँदों की वर्षा ।

३. लगातार वर्षा । बराबर पानी बरसना ।

४. बिना रुके हुए लगातार बहुत सी बातें कहते जाना या चीजें रखते, देते अथवा निकालते जाना । जैसे,— उन्होंने बातों (या गालियों) की झड़ी लगा दी । क्रि॰ प्र॰— बँधना ।—लगना ।—लगाना ।

५. ताले के भीतर का खटका जो चाभी के आघात से हटता बढ़ता है ।