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झमकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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झमकना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ झमक]

१. प्रकाश की किरणें फेंकना । रह रहकर चमकना । दमकना । प्रकाश करना । प्रज्वलित होना ।

२. झपकना । छावा । छा जाना । उ॰—आलस सों कर कौर उठावत नैननि नींद झमकि रहि भारी । दोउ माता निरखत आलस मुख छूबि पर तन मन डारतिं वारी ।—सूर॰, १० ।१२८ ।

३. झम झम शब्द होना । झनकार की ध्वनि होना । उ॰—झूमि झूमि झुकि झुकि झमकि झमकि आली रिमझिम रिमझिम असाढ़ बरसतु हैं ।—ठाकुर, पृ॰ १९ ।

४. झम झम करते हुए उछलना कूदना । गहनों की झनकार के साथ हिलना डोलना । उ॰— (क) कबहुँक निकट देखि बर्षा ऋतु झूलत सुरँग हिडोरे । रमकत झमकत जगक सुता सँग हाव भाव चित चोरे ।—सूर (शब्द॰) । (ख) ज्यों ज्यों आवति निकट निसि त्यौं त्यौं खरी उताल । झमकि झमकि टहलैं करै लगी रहचटै बाल ।— बिहारी र॰, दो॰ ५४३ ।

५. गहनों की झनकार करते हुए नाचना ।

६. लड़ाई में हथियारों का चमकना और खनकना । उ॰—झल्ल लगे चमकन खग्ग लगे झमकन सूल लगे दमकन तेग लगे छहरान ।—गोपाल (शब्द॰) ।

७. अकड़ दिख- लाना । तेजी दिखाना । झोंक दिखाना ।

८. झम झम शब्द करना । बजने का सा शब्द करना । उ॰—तैसिये नन्हीं बूँदनि बरसतु झमकि झमकि झकोर ।—सूर (शब्द॰) ।