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झरप

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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झरप †पु संज्ञा स्त्री॰ [अनु॰]

१. झोंका । झकोंर । उ॰—बंधु कीए मधुप मदंध कीए पुरजन सुमोह्यो मन गंधी की सुगंध झरपन सौ—देव (शब्द॰) ।

२. वेग । तेजी । उ॰—घेरि घेरि घहर घन आए घोर तापैं महा मारुत झकोरत झरप सों ।—कमलापति (शब्द॰) ।

३. किसी चीज को गिरने से बचाने के लिये लगाया हुआ सहारा । चाँड़ । टेक ।

४. चिक । चिल- मन । चिलवन । परदा । उ॰—(क) तासन की गिलमैं गलीचा मखतूलन के झरपैं झुमाऊ रहीं झूमि रंग द्वारी में ।— पद्माकर (शब्द॰) । (ख) झाकैं झुकी युवती ते झरोखन झुंडनि ते झरपैं कर टारी ।—रघुराज (शब्द॰) ।

५. दे॰ 'झड़प' ।