झहराना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]झहराना क्रि॰ अ॰ [अनु॰]
१. शिथिल होकर झर झर शब्द के साथ या लड़खड़ाकर गिरना । उ॰—(क) असुर लै तरु सों पछारयो गिरयो तरु झहराइ । ताल सों तरु ताल लाग्यो उठयो बन बहराइ ।—सूर (शब्द॰) । (ख) आपु गए जमलार्जुन तरु तर, परसत पात उठे झहराई ।—सूर॰, १० ।३८३ । (ग) लपट झपट झहराने, हहराने बात फहराने भट परयो प्रबल परावनो ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १७१ ।
२. झल्लाना । किट— किटाना । खिजलाना । उ॰—(क) एक अभिमान हृदय करि बैठी एते पर झहरानी ।—सूर (शब्द॰) । (ख) नागरि हँसति हँसी उर छाया तापर अति झहरानी । अधर कंप रिस भोंह मरोरी मन की मन गहरानी ।—सूर (शब्द॰) ।
३. हिलाना । उ॰—बालधी फिरावै बार बार झहरावै, झरैं बुँदियाँ सी, लंक पधिलाइ पागि पागिहै ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १७३ ।