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झिरकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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झिरकना पु क्रि॰ सं॰ [हिं॰ झिड़कना] दे॰ 'झिड़कना' । उ॰— (क) छरीदार बैराग विनोदी झिरकि बहिरैं कीन्हैं ।—सूर॰, १ ।४० । (ख) भोर जगि प्यारी अध ऊरघं इतै की और और भाखी खिझि झिरकि उधारि अध पलकै ।— पद्माकर (शब्द॰) ।

२. अलग फैक देना । झटकना । —(क्व॰) । उ॰— मुकुट शिर श्राखंड़ सोहै निरखि रहिं ब्रजनारि । कोटि सुर कोदंड़ आमा झिराकि डारैं वारि ।—सूर (शब्द॰) ।