झूमक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]झूमक ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ झूमना]
१. एक प्रकार का गीत जिसे होली के दिनों में देहात की स्त्रिमाँ झूम झूमकर एक घेरे में नाचती हुई गाती हैं । झूमर । झूमकरा । उ॰— लिए छरी बेत सौंधे विभाग । चाचरि झूमक कहै सरस राग ।— तुलसी (शब्द॰) ।
२. इस गीत के साथ होनेवाला नृत्य ।
३. एक प्रकार का पूरबी गीत जो विशेषतः विवाह आदि मंगल अवसरों पर गाया जाता है । झूमर । उ॰— कहूँ मनोरा झूमक होई । फर औ फूल लिये सबकोई ।— जायसी (शब्द॰) ।
४. गुच्छा । स्तबक ।
५. चाँदी सोने आदि के छोटे छोटे झुमको या मोतियों आदि के गुच्छों की वह कतार जो साड़ी या ओढ़नी आदि के उस भाग में लगी रहती है जो माथे के ठीक ऊपर पड़ता हैं । इसका व्यवहार पूरब में अधिक होता है ।
६. दे॰ 'झुमका' ।