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झेकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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झेकना † क्रि॰ स॰ [अनु॰] झूकाना । बैठना । उ॰— (क) ढोलइ मनह विमासियउ, साँच कहइ छह एह । करह झेकि दोमूँ चढा कूट न संभालेह ।— ढोला॰, दू॰ ६३७ ।(ख) घाली टापर वाग मुखि, झेक्यउ राजदुआरी ।— ढोला॰, दू॰ ३४५ । विशेष— ऊट के बैठने की राजस्थानी में झेकना कहते हैं । ऊँट को बैठाते समय झे झे किया जाता है । उसी के अनुकरण पर यह शब्द बना है ।