झौँर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]झौँर पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ युग्म, प्रा॰ जुम्म, हिं॰ झूमर]
१. झुंड । समूह । उ॰—छकि रसाल सौरभ सने मधुर माधुरी गंध । ठौर ठौर झौंरत झपत झौंर झौंर मधु अंध ।—बिहारी (शब्द॰) ।
२. फुलों, पत्तियों या छोटे छोटे फलों का गुच्छा । उ॰— दाख कैसी झौंर झलकति जोति जोबन की चाटि जाते भौंर जो न होती रंग चंपा की ।—(शब्द॰) ।
३. एक प्रकार का गहना जिसमें मोतिया या चाँदी सोने के दानों के गुच्छे लटकते रहते हैं । झब्बा । उ॰—कलगी तुर्रा झौंर जग्ग सरपेच सुकुंडल ।—सुर (शब्द॰) ।
४. पेड़ों या झाड़ियों का घना समूह । झापस । कुंज । उ॰—बंस झौर गंभीर भीतिकर नहिं सूझत दस आसा ।—रघुराज (शब्द॰) ।
५. दे॰ 'झाँवर' ।
झौँर पु ^२ संज्ञा स्त्री॰ [अनु॰] झंझट । उ॰—तुम काहे को झौंर करौ इतनी, नहिं काज है लाज हिये मढ़िबे को ।—नट॰ पृ॰ ५४ ।