टकसार

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

टकसार † संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰]

१. दे॰ 'टकसाल' । उ॰—पारस रूपी जीव है लोह रूप संसार । पारस से पारस भया, परख भया ठकसार ।—कबीर (शब्द॰) । मुहा॰—टकसार वाणी = प्रामाणिक बात । सच्ची वाणी । उ॰—दूसरे कबीर साहब की जो टकसार वाणी है ।—कबीर मं॰, पु॰ १८ ।

२. जँची या प्रामाणिक वस्तु । उ॰—नष्टै का यह राज है न फरक बरतै द्वैक । सार शब्द टकसार है हिरदय मांहि विवेक ।—कबीर (शब्द॰) ।