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टाटक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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टाटक † ^१ वि॰ [हिं॰] दे॰ 'टटका' । उ॰—(क) घिउ टाटक महँ सोधि सेरावा ।—पदमावत, पृ॰ ५८९ । (ख) भीखा पावत मगन रेन दिन टाटक होत न बासी ।—भीखा श॰, पृ॰, १२ ।

टाटक पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ त्राटक] दे॰ 'त्राटक' । उ॰—टाटक ध्यान जपै नौकारा । जब या जीव को होइ उबारा ।—घट॰, पृ॰ ८५ । यौ॰—टाटक टोटक ।