टेसू
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]टेसू संज्ञा पुं॰ [सं॰ किंशुक]
१. पलाश का फूल । ढाक का फूल । विशेष—इसे उबालने से इसमें से एक बहुत अच्छा पीला रंग निकलता है जिससे पहले कपडे़ बहुत रँगे जाते थे । दे॰ 'पलाश' ।
२. पलाश का पेड़ ।
३. लड़कों का एक उत्सव । उ॰—जे कच कनक कचोरा भरि भरि मेलत तेल फुलेल । तिन केसन को भस्म चढा़वत टेंसू के से खेल ।—सूर (शब्द॰) । विशेष—इसमें विजयादशमी के दिन बहुत से लड़के इकट्ठे होकर घास का एक पुतला सा लेकर निकलते हैं और कुछ गाते हुए घर घर घूमते हैं । प्रत्येक पर से उन्हें कुछ अन्न या पैसा मिलता है । इसी प्रकार पाँच दिन तक अर्थात् शरद् पूनो तक करते हैं और जो कुछ भिक्षा मिलती है उसे इकठ्ठा करते जाते हैं । पूनों की रात को मिले हुए द्रव्य से लावा, मिठाई आदि लेकर वे बोए हुए खेतों पर जाते हैं जहाँ बहुत से लोग इकट्ठे होते हैं और बलाबल की परीक्षा संबंधी बहुत सी कसरतें और खेल होते हैं । सबके अंत में लावा, मिठाई लड़कों में बँटती है । टेसू के गीत इस प्रकार के होते हैं—इमली के जड़ से निकली पतंग । नौ सौ मोती नौ सौ रंग । रंग रंग की बनी कमान । टेसू आया घर के द्वार । खोलो रानी चंदन किवार ।