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टोडी़

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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टोडी़ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ त्रोटकी]

१. एक रागिनी जिसके गाने का समय १० दंड से १६ दंड पर्यत है । विशेष—इसका स्वरग्राम इस प्रकार है— स रे ग म प ध नि स स नि ध प म ग ग रे स । रे सा नि स नि ध ध नि स ग रे स नि स नि ध । प ग ग म रे ग रे स रे नि स नि ध स रे ग म प ध ध प । म ग म ग रे स नि स रे रे स नि ध ध ध नि स । हनुमत मत से इसका स्वरग्राम यह है—म प ध नि स रे ग म अथवा स रे ग म प ध नि स । यह संपूर्ण जाति की रागिनी हैं । इसमें शुद्ध मध्यम और तीव्र मध्यम के अतिरिक्त बाकी सब स्वर कोमल होते हैं । यह भैरव राग की स्त्री मानी जाती है और इसका स्वरूप इस प्रकार कहा गया है—हाथ, में वीणा लिए हुए, प्रिय के विरह में गाती हुई, श्वेत वस्त्र धारण किए और सुंदर नेत्रोंवाली ।

२. चार मात्राओं का एक ताल जिसमें २ आघात और २ खाली + ॰ रहते हैं । इसका तबले का बोल यह है—धिन् धा, गेदिन, ३ ॰ + जिनता, गोदिन, धा । अथवा । + ॰ ॰ ॰ + धेद्धां के टे, नेद्धा के टे । धा ।