टोली

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

टोली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ तोलिका ( = हाता, बाडा़)]

१. छोटा महल्ला । बस्ती का छोटा भाग । उ॰—नैन बचाय चवाइन के नहिं रैन में ह्वै निकसी यह टोली ।—सेवक (शब्द॰) ।

२. समूह । झुँड । जत्था । मंडली । उ॰—इस टोली ते सतगुरु राखै ।— प्राण॰, ८८ ।

३. पत्थर की चौकोर पटिया । सिल ।

४. एक जाति का बाँस जो पूर्वीय हिमालय, सिक्किम और आसाम की ओर होता है । विशेष—इसकी आकृति कुछ कुछ पेड़ों की होती है और इसमें ऊपर जाकर टहनियाँ निकलती है । यह बाँस बहुत सीधा और सुडौल होता है । टोकरे बनाने के लिये यह बाँस सवसे अच्छा समझा जाता है । यह छप्परों में लगता है और चटाइयाँ बनाने के काम में भी आता है । इसे 'नाल' और 'पकोक' भी कहते हैं ।