ठनना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठनना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ ठानना]

१. (किसी कार्य का) तत्परता के साथ आरंभ होना । द्दढ़ संकल्पपूर्वक आरंभ किया जाना । अनुष्ठित होना । समारंभ होना । छिड़ना । जैसे, काम ठनना, झगड़ा ठनना, बैर ठनना, युद्ध ठनना, लड़ाई ठनना ।

२. (मन में) स्थिर होना । ठहरना । निश्चित होना । पक्का होना । द्दढ़ होना । चित्त में द्दढ़तापूर्वक धारण किया जाना । द्दढ़ संकल्प होना । जैसे, मन में कोई बात ठनना, हठ ठनना । उ॰—हरिचंद जू बात ठनी तो ठनी नित की कलकानि ते छूटनो है ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

३. ठहरना । लगना । कल कोकिल कंठ बनी मृग खंजन मंजन भाँति ठनी ।— केशव (शब्द॰) ।

४. उद्यत होना । मुस्तैद होना । सन्नद्ध होना । उ॰—रन जीतन काजै भटन निवाजै आनंद छाजैं युद्ध ठने ।—गोपाल (शब्द॰) । मुहा॰—किसी बात पर ठनना = किसी बात या काम को करने के लिये उद्यत होना ।