ठाटना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठाटना क्रि॰ स॰ [हिं॰ ठाठ + ना (प्रत्य॰)]

१. रचना । बनाना । निर्मित करना । संयोजित करना । उ॰—बालक को तन ठाटिया निकट सरोवर तीर । सुर नर मुनि सब देखहिं साहेब धरेउ सरीर ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. अनुष्ठान करना । ठानना । करना । आयोजन करना । उ॰—(क) महतारी को कह्यो न मानत कपट चतुरई ठाटी ।—सूर (शब्द॰) । (ख) पालव बैठि पेड़ एइ काढा । सुख मँह सोक ठाट धरि ठाठा ।—तुलसी (शब्द॰) ।

३. सुसज्जित करना । सजाना । सँवारना ।