ठिकाना

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हिन्दी[सम्पादन]

संज्ञा[सम्पादन]

  1. स्थान, जगह, पता

क्रिया[सम्पादन]

  1. ठीक करना, सही स्थान पर ले जाना

उदाहरण[सम्पादन]

रहने का स्थान
  1. आज कल तुम्हारा ठिकाना कहाँ है?
  2. मैं तो रहने के लिए कोई ठिकाना ढूंढ रहा हूँ।
ठिकाने लगाना
  1. तुम इस लाश को ठिकाने लगा दो।
  2. उसने तो एक ही झटके में उसका दिमाग ठिकाने लगा दिया।

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ठिकाना ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ टिकान]

१. स्थान । जगह । ठौर ।

२. रहने की जगह । निवासस्थान । ठहरने की जगह । यौ॰—पत्ता ठिकाना ।

३. आश्रय । स्थान । निर्वाह करने का स्थान । जीविका का अवलंब । मुहा॰—ठिकाना करना = (१) जगह करना । स्थान निश्चित करना । स्थान नियत करना । जैसे,—अपने लिये कहीं बैठने का ठिकाना करो । (२) टिकना । डेरा करना । ठहरना । (३) आश्रय ढूँढना । जीविका लगाना । नौकरी या काम धंधा ठीक करना । जैसे,—इनके लिये भी कहीं ठिकाना करो, खाली बैठे हैं । (४) ब्याह के लिये घर ढूँढना । ब्याह ठीक करना । जैसे,—इनका भी कहीं ठिकाना करो, घर बसे । ठिकाना ढूँढ़ना = (१) स्थान ढूँढ़ना । जगह तलाश करना । (२) रहने या ठहरने के लिये स्थान ढूँढ़ना । निवास स्थान ठहराना । (३) नौकरी या काम धंधा ढूँढ़ना । जीविका खोजना । आश्रय ढूँढ़ना । (४) कन्या के ब्याह के लिये घर ढूँढ़ना । वर खोजना । (किसी का) ठिकाना लगना = (१) आश्रयस्थान मिलना । ठहरने या रहने की जगह मिलना । उ॰—सिपाही जो भागे तो बीच में कहीं ठिकाना न लगा ।—(शब्द॰) । (२) जीविका का प्रबंध होना । नौकर ी या काम घंधा मिलना । निर्वाह का प्रबंध होना । जैसे,—इस चाल से तुम्हारा कहीं ठिकना न लगेगा । ठिकाना लगाना = (१) पता चलाना । ढूँढ़ना । (२) आश्रय देना । नौकरी या काम धंधा ठीक करना । जीविका का प्रबंध करना । ठिकाने आना = (१) अपने स्थान पर पहुँचना । नियत वा वांछित स्थान पर वास होना । उ॰—जो कोउ ताको निकट बतावै । धीरज धरि सो ठिकाने आवै ।—सूर (शब्द॰) । (२) ठीक विचार पर पहुँचना । बहुत सोच— विचार या बातचीत के उपरांत यथार्थ बात करना या सम— झना । जैसे, बुद्धि ठिकाने आना । उ॰—हाँ इतनी देर के बाद अब ठिकाने आए ।—(शब्द॰) । (३) मूल तत्व पर पहुँचना । असली बात छेड़ना या कहना । प्रयोजन की बात पर आना । मतलब की बात उठाना । ठिकाने की बात = (१) ठीक बात । सच्ची बात । यथार्थ बात । प्रामाणिक बात । असली बात । (२) समझदारी की बात । युक्तियुक्त बात । (३) पते की बात । ऐसी बात जिससे किसी विषय में जानकारी हो जाय । ठिकाने न रहना = चंचल हो जाना । जैसे, बुद्धि ठिकाने न रहना, होश ठिकाने न रहना । ठिकाने पहुँचाना = (१) यथास्थान पहुँचाना । ठीक जगह पहुँचाना । (२) किसी वस्तु को लुप्त वा नष्ट कर देना । किसी वस्तु को न रहने देना । (३) मार डालना । ठिकाने लगना = (१) ठीक स्थान पर पहुँचना । वांछित स्थान पर पहुँचना । (२) काम में आना । उपयोग में आना । अच्छी जगह खर्च होना । उ॰—चलो अच्छा हुआ, बहुत दिनों से यह चीज पड़ी थी, ठिकाने लग गई ।—(शब्द॰) । (३) सफल होना । फलीभूत होना । जैसे, मिहनत ठिकाने लगना । (४) परम धाम सिधारना । मर जाना । मारा जाना । ठिकाने लगाना = (१) ठीक जगह पहुँचाना । उपयुक्त वा वांछित स्थान पर ले जाना । (२) काम में लाना । उपयोग में अच्छी जगह खर्च करना । (३) सार्थक करना । सफल करना । निष्फल न जाने देना । जैसे, मिहनत ठिकाने लगाना । (४) इधर उधर कर देना । खो देना । लुप्त कर देना । गायब कर देना । नष्ट कर देना । न रहने देना । (५) खर्च कर डालना । (६) आश्रय देना । जीविका का प्रबंध करना । काम धंधो में लगाना । (७) कार्य को समाप्ति तक पहुँचाना । पूरा कराना । (८) काम तमाम करना । मार डालना ।

४. निशिच्त अस्तित्व । यथार्थता की संभावना । ठीक प्रमाण । जैसे,—उसकी बात का क्या ठिकाना ? कभी कुछ कहता है कभी कुछ ।

५. दृढ़ स्थिति । स्थायित्व । स्थिरता । ठहराव । जैसे,—इस टूटी मेज का क्या ठिकाना, दूसरी बनाओ । विशेष—इन अर्थों में इस शब्द का प्रयोग प्रायः निषेधात्मक या संदेहात्मक वाक्यों ही में होता है । जैसे,—रुपया तो तब लगावें जब उनकी बात का कुछ ठिकाना हो ।

५. प्रबंध । आयोजन । बंदोबस्त । डैल । प्राप्ति का द्वार या ढंग । जैसे,—(क) पहले खाने पीने का ठिकाना करो, और बातें पीछे करेंगे । (ख) उसे तो खाने का ठिकाना नहीं है । उ॰— दो करोड़ रुपए साल की आमदनी का ठिकाना हुआ ।— शिवप्रसाद (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना । मुहा॰—ठिकाना लगना = प्रबंध होना । आयोजन होना । प्राप्ति का डौल होना । ठिकाना लगाना = प्रबंध करना । डौल लगाना ।

६. पारावार । अंत । हद । जैसे,—(क) वह इतना झूठ बोलता है जिसका ठिकाना नहीं । (ख) उसकी दौलत का कहीं ठिकाना है ? विशेष—इस अर्थ में इस शब्द का प्रयोग प्रायः निषेधार्थक वाक्यों ही में होता है ।

ठिकाना † ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ ठिकना]

१. ठहराना । अड़ाना । स्थित करना ।

२. किसी अन्य की वस्तु को गुप्त रूप से अपने पास रख लेना या छिपा लेना ।