डर

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हिन्दी

संज्ञा

  1. भय, दहशत, उद्वेग, घबराहट

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

डर संज्ञा पुं॰ [सं॰ दर]

१. दु:खपूर्ण मनोवेग लो किसी अनिष्ट या हानि की आशंका से उत्पन्न होता और उस (अनिष्ट वा हानि) से बचने के लिये आकुलता उत्पन्न करता है । भय । भीति । खौफ । त्रास । उ॰—नाथ लखनु पुरु देखत चहहँ । प्रभु संकोच डर प्रकट न कहहीं ।—मानस, १ । २१८ । क्रि॰ प्र॰—लगना ।—खाना । उ॰—पैग पैग भुँइ चाँपत आवा । पंखिन्ह देखि सबन्हि डर खावा ।—जायसी ग्रं॰ (गुप्त), पृ॰ १६५ । मुहा॰—डर के मारे = भय के कारण ।

२. अनिष्ट की संभावना का अनुमान । आशंका । जैसे,—हमें डर है कि वह कहीं भटक न जाय ।