डेल
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]डेल ^१ संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] वह भूमि जो रबी की फसल के लिये जोत— कर छोड़ दी जाय । परेल ।
डेल ^२ संज्ञा पुं॰ [देश॰] कटहल की तरह का एक बड़ा ऊँचा पेड़ जो लंका में होता है । विशेष— इसके हीर की लकड़ी चमकदार और मजबूत होती है, इसलिये वह मेज कुरसी तथा सजावट के अन्य सामान बनाने वह काम में आती है । नावें भी उसकी अच्छी बनती हैं । इस पेड़ में कटहल के बरबार बड़े फल लगते हैं जो खाए जाते हैं । बीज भी खाने के काम में आते हैं । इन बीजों में से तेल निकलता है जो दवा और जलाने के काम में आता है ।
डेल ^३ संज्ञा पुं॰ [सं॰ डुण्डुल] उल्लू पक्षी । उ॰— धननाद, जोवत, राजमद ज्यों पंछिन मँह डेल ।— स्वामी हरिदास (शब्द॰) ।
डेल ^४ संज्ञा पुं॰ [सं॰ दल, हिं॰ डला] ढेला । पत्थर, मिट्टी या इँट का टुकड़ा । रोड़ा । उ॰— (क) नाहिं न रास रसिक रस चाख्यो तातें डेल सो डारो ।— सूर (शब्द॰) । (ख) डेल सो बनाय आय मेलत सभा के बीच लोगन कवित्त कीवौ खेल करि जानो है ।— इतिहास, पृ॰ ३८४ । क्रि॰ प्र॰ — डेल करवा = नष्ट करना । ढेला या रोड़ा कर देना । समाप्त करना ।— नंद॰ ग्र॰, पृ॰ २७७ ।
डेल † ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ डला] वह डला जिसमें बहेलिए पक्षी आदि बंद करके रखते हैं । उ॰—कित नैहर पुनि आउब, कित ससुरे यह खेल । आपु आपु कहँ होइहि, परब पंखि जस डेल ।— जायसी (शब्द॰) ।