डोभ
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]डोभ संज्ञा पुं॰ [सं॰ डम, देशी डुंब, डोंब] [स्त्री॰ डोमिनी, डोमनी]
१. अस्पृश्य मीच जाति जो पंजाब से लेकर बंगाल तक सारे उत्तरी भारत में पाई जाती है । उ॰—यह देखो डोम लोगों ने सुखे गले सड़ें फूलों की माला गंगा में से पकड़ पकड़कर देवी को पहिना दी है और कफन की ध्वजा लगा दी है ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ २९७ । विशेष—स्मृतीयों में इस जाति का उल्लेख नहीं मिलता । केवल मत्स्यसूक्त तंत्र में डोमों को अस्पृश्य लिखा है । कुछ लोगों का मत है कि ये डोम बोद्ध हो गए थे और इस धर्म का संस्कार इनमें अब तक बाकी है । इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी समय यह जाति प्रबल हो गई थी, और कई स्थान डोमों के अधिकार में आ गए थे । गोरखपुर के पास डोमन- गढ़ का किला डोम राजाओं का बनवाया हुआ था । पर अब यह जाति प्रायः निकृष्ट कर्मों ही के द्वारा अपना निर्वाह करती है । श्मशान पर शव जलाने के लिये आग देना, शव के ऊपर का कफन लेना, सूप, डले आदि बेचना आजकल डोमों का काम है । पंजाब के डोम कुछ इनसे भिन्न होतो हैं और जंगलों से फल और जड़ी बुटी लाकर बेचते हैं ।
२. एक नीच जाति जो मंगल के अवसरों पर लोगों के यहाँ गाती बजाती है । ढाढी । मीरासी ।