ढीलना

विक्षनरी से
Jump to navigation Jump to search


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ढीलना क्रि॰ सं॰ [हिं॰ ढीला]

१. ढीला करना । कसा या तना हुआ न रखना । बंधन आदि की लंबाई बढ़ाना जिससे बँधी हुई वस्तु और आगै या इधर उधर बढ़ सके । जैसे, पतंग की डोरी ढोलना, रास ढीलना । संयो॰ क्रि॰—देना ।

२. बंधनमुक्त करना । छोड़ देना । उ॰ —तापै सूर बछरुवन ढीलत बन बन फिरत बहे ।—सूर (शब्द॰) ।

३. (पकड़ी हुई रस्ती आदि को) इस प्रकार छोड़ना जिसमें वह आगे या नीचे की ओर बढ़ती जाय । डोरी आदि को बढ़ाना या ड़ालना । जैसे, कुएँ में रस्सी ढोलना ।

४. किसी गाढ़ी वस्तु को पतला करने के लिये उसमें पानी आदि डालना ।

५. संभोग करना । प्रसंग करना । (बाजारू) । †

६. धारण करना । जैसे,— आज वे धोती ढीलकर निकले हैं ।