तंत्रता

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तंत्रता संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ तन्त्रता] कई कार्यों के उद्देश्य से कोइ एक कार्य करना । कोइ ऐसा कार्य करना जिससे अनेक उद्देश्य सिद्ध हों । जैसे, यदि किसी ने अनेक प्रकार के पाप किए हों तो उनमें प्रत्येक पाप के लिये प्रायश्चित्त न करके एक ऐसा प्राय- श्चित्त करना जिससे सब पाप नष्ट हो जायँ अथवा बार बार अस्पृश्य होने की दशा में प्रत्येक बार स्नान न करके सबके अंत में एक ही बार स्नान कर लेना । ( धर्मशास्त्र) ।