तंदुल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तंदुल †पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ तण्डुल]

१. दे॰ 'तडुल' । उ॰— (क) तंहल माँगि दो चिलाई सो दीन्हों उपहार । फाटे बसन बाँधि कै । रजवर अति दुर्बल तनहार ।— सूर (शब्द॰) (ख) तिल तंदुल के न्याय सों है संसृष्टि बखान । छीर नीर के न्याय सों संकर कहत सुजान ।— पद्माकर ग्रं॰, पृ॰ ७४ ।

२. दे॰ ' तंडुल' । उ॰— आठ श्वेत सरसों को तंदुल जानिये । दश तंदुल परिमाण सुगुंजा मानिये ।— रत्नपरीक्षा (शब्द॰) ।

तंदुल पु ^२ संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ तंदुर] गर्जन । आवाज । ध्वनि । उ॰— बज चिक्कार फिकार सबद्दं । तंदुल तबल मृदंग रबइं ।— पृ॰ रा॰, ९ ।१२७ ।