तंबूरा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तंबूरा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ तानपूरा या तुम्बुरु (गंधर्व)] बीन या सितार की तरह का एक बहुत पुराना बाजा जो अलापचारी में केवल सुर का सहारा देने के लिये बजाया जाता है । तान- पूरा । उ॰— अजब तरह का बना तंबूरा, तार लगे सौ साठ रे । खूँटी टूटी तार बिलगाना कोई न पूछे बात रे ।— कबीर श॰, पृ॰ ४७ । विशेष— इससे राग के बोल नहीं निकाले जाते । इसमें बीच में लोहे के दो तार होते हैं जिनके दोनों ओर दो और तार पीतल के होते हैं । कुछ लोग कहते हैं कि इसे तुंबुरु गंधर्व ने बनाया था, इसी से इसका नाम तंबूरा पड़ा । इसकी जवारी पर तारों के नीचे सूत रख देते हैं जिसके कारण उनसे निकलनेवाले स्वर में कुछ झनझनाहट आ जाती है ।

तंबूरा तोप संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ तंबुरा + तोप] एक प्रकार की बड़ी तोप ।