तखत

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तखत संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ तख्त] दे॰ 'तख्त' । उ॰—दीजै भेजि हरम हजूर मरहट्ठी बेगि, चाहियै जो कुसल तख्त सिरताजी कौं ।— हम्मीर॰, पृ॰ २१ । मुहा॰—तखत पलटना = तख्ता उलटना । उ॰—जब निबध हो बने सबल संगी । तभ पलटते न किस तरह तखने । तो चले क्यों बराबरी करने । बल बराबर अगर नहीं रखते ।— चुभते॰ पृ॰ ६८ ।