तचना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

तचना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ तचना] तपना । तप्त होना । उ॰—(क) तापना सों तवती बिरमैं बिन काज वृथा मन माँहि बिदूषतीं ।—प्रताप (शब्द॰) । (ख) मानों विधि अब उलटि रची री । जानस नहीं सखी काहैं ते वही न तेज तची री ।— सूर (शब्द॰) ।