सामग्री पर जाएँ

तदुर

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

तदुर संज्ञा पुं॰ [फ़ा॰ तनूर] अँगीठी, चूल्हे या भट्ठी आदी की तरह का बना हुआ एक प्रकार का मिट्टी का बहुत बड़ा, गोल और ऊँचा पात्र जिसके नीचे का भाग कुछ अधिक चौड़ा होता है । उ॰— आज तंदूर से गरम रोटी लपककर भूखे की झोली में आ गिरी ।— बंदनवार, पृ॰, ५९ । विशेष— इसमें पहले लकड़ी आदि की खूब तेज आँच सुलगा देते हैं और जब वह खूब तप जाता है तब उसकी दीवारों पर भीतर की ओर मोटी रोटियाँ चिपका देते हैं जो थोड़ी देर में सिककार लाल हो जाती हैं । कभी कभी जमीन में गड़्ढा खोदकर भई तंदूर बनाया जाता है । क्रि॰ प्र॰—लगाना । मुहा॰— संदूर झोंकना = भाड़ झोंकना । निकृष्ट काम करना ।