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तपोलोक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तपोलोक संज्ञा पुं॰ [सं॰] पुराणानुसार चौदह लोकों में से ऊपर के सात लोकों में से छठा लोक जो जनलोक और सत्य लोक के बीच में है । विशेष—पदमपुराण में लिखा है कि यह लोक तेजोमय है; और जो लोग अनेक प्रकार की कठिन तपस्याएँ करके भी कृष्ण भगवान् को संतुष्ट करते हैं; वे इस लोक में भेजे जाते हैं ।