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तप्तकुंभ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तप्तकुंभ संज्ञा पुं॰ [सं॰ तप्तकुम्भ] पुराणानुसार एक बहुत भयानक नरक जिसके विषय में यह माना जाता है कि वहाँ खौलते हुए तेल के कड़ाहे रहते हैं । उन्हीं कड़ाहों में दुराचारियों को यम के दूत फेंक दिया करते हैं ।