तप्तकृच्छ्र
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]तप्तकृच्छ्र संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक प्रकरा का व्रत जो बारह दिनों में समाप्त होता और प्रायश्चित्तस्वरूप किया जाता है । विशेष—इसमें व्रत करनेवालों को पहले तीन दिन तक प्रतिदिन तीन पल गरम दूध, तब दीन दिन तक नित्य एक पल घी, फिर तीन दिन तक रोज छह पल गरम जल और अंत में तीन दिन तक गरम वायु सेवन करना होता है । गरम वायु से तात्पर्य गरम दूध से निकलनेवाली भाप का है । यह व्रत करने से द्विजों के सब प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं । किसी किसी के मत से यह व्रत केवल चार दिनों में किया जा सकता है । इसमें पहले दिन तीन पल गरम दूध, दूसरे दिन एक पल गरम घी और तीसरे दिन छह पल गरम जल पीना चाहिए और चौथे दिन उपवास करना चाहिए ।