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तरजनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तरजनी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ तर्जनी] अँगूठे के पास की उँगली । उ॰— (क) इहाँ कुम्हड़ वतिया कोउ नाहीँ । जे तरजनी देखि मरि जाहीं ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) सरुख बरजि तर्जिय तरजनी कुम्हिलैहै कुम्हडे़ को जई है ।—तुलसी (शब्द॰) ।

तरजनी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ तर्जन] भय । डर । उ॰—अहो रे विहंगम बनवासी । तेरे बोल तरजनी बाढ़ति श्रवनन सुनत नींदऊ नासी ।—सूर (शब्द॰) ।