तवना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]तवना पु † ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ तपन]
१. तपना । गरम होना ।
२. ताप से पीड़ित होना । दुःख से पीड़ित होना । उ॰— (क) काल के प्रताप कासी तिहूँ ताप तई है ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ २४२ । (ख) जबते न्हान गई तई ताप भई बेहाल । भली करी या नारि की नारी देखी लाल ।—श्रृं॰ सत॰ (शब्द॰) ।
३. प्रताप फैलाना । तेज पसारना । उ॰— छतर गगन लग ताकर सूर तवइ जस आप ।—जायसी (शब्द॰) ।
४. क्रोध से जलना । गुस्से से लाल होना । कुढ़ जाना । उ॰— (क) भरत प्रसंग ज्यों कालिका लहू देखि तन में तई ।—नाभावास (शब्द॰) । (ख) महादेव बैठे रहि गए । दक्ष देखि के तेहि दुख तए ।—सूर (शब्द॰) ।
तवना पु ^३ क्रि॰ अ॰ [स्तवन] स्तुति करना ।
तवना † ^४ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ तवा] हलका तवा ।
तवना पु † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ ताना (= ढकना, मूँदना)] ढक्कन । मूँदने का साधन जो छेद या किसी वस्तु के मुँह को बंद करे ।