ताटंक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]ताटंक संज्ञा पुं॰ [सं॰ ताटङ्क]
१. कान में पहनने का एक गहना । करनफूल । तरकी । उ॰—चलि चलि जात निकट स्रवननि के उलटि पलचि ताटंक फँदाते ।—संतवाणी॰, पृ॰ ५५ ।
२. छप्पय के २४ वें भेद का नाम ।
३. एक छंद जिसके प्रत्येक चरण में १६ और १४ के विराम से ३० मात्राएँ होती हैं और अंत में मगण होता है । किसी किसी के अंत में एक गुरु का ही नियम रखा है । लावनी प्रायः इसी छंद में होती है ।