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ताम्रलिप्त

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ताम्रलिप्त संज्ञा पुं॰ [सं॰] मेदिनीपुर (बंगाल) जिले के तमलूक नामक स्थान का प्राचीन नाम । विशेष—पूर्व काल में यह व्यापार का प्रधान स्थल था । बृहत्कथा को देखने से विदित होता हैग कि यहाँ से सिंहल, सुमात्रा, जावा चीन इत्यादि देशों की ओर बरावर व्यापारियों को कलिंग से लगा हुआ समुद्र तटस्थ एक देश लिखा हैं । पाली ग्रंथ महावंश से पता लगता है कि ईसा से ३९० वर्ष पूर्व ताम्रालिप्त नगर भारतवर्ष के प्रसिद्ध बंदरगाहों में से था । यहीं जहाज पर चढ़कर सिंहल के राजा ने प्रसिद्ध बोधिद्रुम को लेकर स्वदेश की ओर प्रस्थान किया था ओर महाराज अशोक ने समुद्रतट पर खडे़ होकर उसके लिये आँसू बहाए थे । ईसा की पाँचवीं शताब्दी में चीनी यात्री फहियान बौद्ध ग्रंथों की नकल आदि लेकर ताम्रलिप्त ही से जहाज पर बैठ सिंहल गया था । रामायण में ताम्रालिप्त का कोई उल्लेख नहीं है, पर महाभारत में कई स्थानों पर है । वहाँ के निवासी ताम्रालिप्तक भारतयुद्ध में दुर्योधन की ओर से लड़े थे । पर उनकी गिनती म्लेच्छ जातियों के साथ हुई है । यथा—शकाः किराता दरदा बर्बरा ताम्रलिप्तकाः । अन्ये च बहवो म्लेच्छा विविधायुधपाणयः । (द्रोणपर्व) ।