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तालकेश्वर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तालकेश्वर संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक ओषध जो कुष्ट, फोड़ा फुंसी आदि में दी जाती है । विशेष—दो माशे हरताल में पेठे के रस, धीकुआर के रस और तिल के तेल की भावना देते हैं । फिर दो नाशे गंधक और एक माशे पारे को मिलाकर कज्जली करते और उसमें भावना दी हुई हरताल मिलाकर फिर सब में क्रम से बकरी के दूध, नीबू के रस और घीकुआर के रस की तीन दिन भावना देते हैं । अंत में सब का गोल कतरा बनाकर उसे हाँड़ी में क्षा र के भीतर रख बारह पहर तक पकाते हैं और फिर ठंढा होने पर उतार लेते हैं ।