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तिरसूत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तिरसूत पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ त्रिसूत्र] तीन तागों का यज्ञोपवीत । यज्ञोपवीत । उ॰— ताके परछों पाँय ब्रह्म अपने को पावै । भर्म जनेऊ तोरि प्रेम तिरसूत बनावै ।—पलटू॰, भा॰ १, पृ॰ ११३ ।