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तिर्यक्

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तिर्यक् ^१ वि॰ [सं॰] तिरछा । आड़ा । टेढ़ा । विशेष— मनुष्य को छोड़ पशु पक्षी आदि जीव तिर्यक् कहलाते हैं क्योंकि खडे़ होने में उनके शरीर का विस्तार ऊपर की ओर नहीं रहता, आड़ा होता है । इनका खाया हुआ अन्न सीधे ऊपर से नीचे की ओर नहीं जाता, बल्कि आड़ा होकर पेट में जाता है ।

तिर्यक् ^२ क्रि॰ वि॰ वक्रतापूर्वक । टेढे़पन के साथ [को॰] ।

तिर्यक् ^३ संज्ञा पुं॰

१. पशु ।

२. पक्षी [को॰] ।